Corona Virus And The World

The world of work has been greatly affected by the corona virus epidemic. Apart from the threat to public health, economic and social disruption is a threat to the livelihood and wellbeing of millions of people over the long term. Governments, workers and employers will play an important role in dealing with this fierce outbreak, protecting individuals and ensuring the stability of businesses and jobs. 

Social distance is usually boycotted, but it became necessary to maintain social distance during the Corona period. The Honorable Prime Minister's slogan is, "Two yards were necessary to defeat Corona." Here, we have played the religion of humanity by rising above caste, religion, sect, which was necessary. We sacrificed our social celebrations, ceremonies, etc. so that this epidemic was least spread. 

The biggest side effect of this epidemic was on the daily wage workers. Their work was stopped, they were craving for food, even thinking that we are shivering, just think, what happened to the people in that situation. Time is slowly coming back on track, some jobs have started, hopefully we will soon start living a normal life and this tragic disaster will end. Read More...


कोरोना वायरस की महामारी से काम की दुनिया बहुत अधिक प्रभावित हुई है। सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरे के अलावा, आर्थिक और सामाजिक व्यवधान लंबे समय तक आजीविका और लाखों लोगों की भलाई के लिए खतरा है। सरकारें, श्रमिक और नियोक्ता, इस भयंकर प्रकोप से निपटने में, व्यक्तियों की सुरक्षा और व्यवसायों और नौकरियों की स्थिरता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। 

सामाजिक दूरी का आमतौर पर बहिष्कार किया जाता है, लेकिन कोरोना अवधि के दौरान सामाजिक दूरी बनाए रखना आवश्यक हो गया। माननीय प्रधान मंत्री का नारा है, "कोरोना को हराने के लिए दो गज की दूरी आवश्यक थी।" यहां, हमने जाति, धर्म, संप्रदाय से ऊपर उठकर मानवता का धर्म निभाया है, जो आवश्यक था। हमने अपने सामाजिक उतसव, समारोह आदि का बलिदान किया ताकि यह महामारी कम से कम फैलने पाए। 

इस महामारी का सबसे बड़ा दुष्प्रभाव दैनिक मजदूरी करने वालों पर पड़ा। उनका काम रुक गया था, वे खाने के किये तरस गए, यह सोचकर भी हम कांप उठते हैं, ज़रा सोचिए, उस स्थिति में रहने वालों का क्या हुआ। समय धीरे-धीरे वापस पटरी पर आ रहा है, कुछ नौकरियां शुरू हो गई हैं, आशा है कि हम जल्द ही सामान्य जीवन जीने लगेंगे और यह दुखद आपदा समाप्त हो जाएगी। 


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