Sharad Navratri 2020 -8. Mahagauri

Today is the eighth day of Nav Durga and this day are dedicated to Maa Mahagauri. It is a legend, Goddess Shailputri, who obtained Lord Shiva as her husband after hard penance. She had turned black during the days of hard penance. When Lord Shiva was impressed by her love and sacrifice, he washed her with pure Ganges water. This made him white and pearl-like. After this, the goddess's name became Mahagauri. 

This avatar is named Gauri because of its color. She wears white clothes and hence is also known as Shvetambardhara. He has four arms. She holds the trident in one right hand and the abhaya mudra in the other hand. Her left hand is Damru and the other hand is in the boon posture. She rides a bull and is therefore also known as "bull rider." 

By meditating and worshiping Maa Mahagauri, the seekers get welfare. We should always meditate her. Motivates human beings towards truth and destroys the untruth. Worshiping them also makes the impossible tasks of the seekers possible. Therefore, we should be purified with a pure sense and go to the mother's shelter, so that sin and suffering do not come near us in the future. Read More…


आज नव दुर्गा का आठवां दिन हैं और ये दिन माँ महागौरी को समर्पित हैं। यह एक पौराणिक कथा है, देवी शैलपुत्री, जिन्होंने कठिन तपस्या के बाद भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त किया। कठिन तपस्या के दिनों में, वह कृशकाय हो गई थी। जब भगवान शिव उसके प्यार और बलिदान से प्रभावित हुए, तो उन्होंने उसे शुद्ध गंगा जल से धोया। इसने उसे सफेद और मोती की तरह चमकदार बना दिया। इसके बाद, देवी का नाम महागौरी हो गया। 

इस अवतार को गौरी नाम दिया गया है क्योंकि यह अपने रंग के कारण है। वह सफेद कपड़े पहनती है और इसलिए उसे श्वेतांबरधरा के नाम से भी जाना जाता है। उसकी चार भुजाएँ हैं। वह एक दाहिने हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में अभय मुद्रा धारण करती हैं। उसके बाएं हाथ में डमरू और दूसरा हाथ वरदान की मुद्रा में है। वह बैल की सवारी करती है और इसलिए उसे वृषारूढ़ा के नाम से भी जाना जाता है। 

माँ महागौरी का ध्यान-स्मरण और पूजन-आराधन करने से साधकों का कल्याण होता हैं। हमें सदा ही इनका ध्यान करना चाहिए। मनुष्य की वृतियों को सत की ओर प्रेरित करती हैं और असत का विनाश करती हैं। इनका आराधन करने से साधकों के असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। अतः हमें निर्मल भाव से शुध्द होकर माँ की शरण में जाना चाहिए, जिससे भविष्य में पाप-संताप हमारे समीप नहीं आते। 


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