Make Improvements, Not Excuses

Our thoughts change our mind, our mind changes our character, thus our whole life changes. Therefore we should think positively, because good thinking leads us to a brilliant life. We must be pure in mind, mind and character. Your thought process will affect your way of living and the results of your life. Because whatever you think, your working system will be the same and you will address people in the same way. 

Thinking is an integral part of your mental process. There will be good thinking and bad thinking. This has an impact on your decisions, actions, so it is necessary to control your thoughts. You need to focus on good thoughts while being disciplined. Do yoga and pranayama, increase your mental concentration, once you have these qualities, you can keep your thoughts under control. This is the only way possible. 

Our thinking or thoughts also depend on our vision and knowledge. When our vision and knowledge are limited, our thoughts will also be narrow. Thus selfish people always keep their thoughts and vision limited to their selfish desires and objectives and can behave like opportunists with no pervasiveness in their mind and heart. Similarly, philanthropists make philanthropy their ideology. Read More...


हमारे विचार हमारे मन को बदलते हैं, हमारा मन हमारे चरित्र को बदलता है, इस प्रकार हमारा पूरा जीवन बदल जाता है। इसलिए हमें सकारात्मक सोचना चाहिए, क्योंकि अच्छी सोच ही हमें एक शानदार जीवन की ओर ले जाती है। हमें मन, मस्तिष्क और चरित्र में शुद्ध होना चाहिए। आपकी विचार प्रक्रिया आपके जीवन जीने के तरीके और आपके जीवन के परिणामों को प्रभावित करेगी। क्योंकि आप जो भी सोचते हैं, आपकी कार्य प्रणाली भी उसी तरह की होगी और आप लोगों को उसी तरह से संबोधित करेंगे।

सोचना आपकी मानसिक प्रक्रिया का अभिन्न अंग हैं। अच्छी सोच और बुरी सोच होगी। इसका आपके निर्णयों, कार्यों पर प्रभाव पड़ता है इसलिए अपने विचारों पर नियंत्रण रखना आवश्यक है। आपको अनुशासित रहते हुए अपना ध्यान अच्छे विचारों पर केंद्रित करने की आवश्यकता है। योग और प्राणायाम कीजिए, अपने मानसिक एकाग्रता को बढ़ाए, एक बार जब आप इन गुणों को धारण कर लेंगे तो आप अपने विचारों को नियंत्रण में रख सकते हैं। यही एकमात्र तरीका संभव है।

हमारी सोच या विचार हमारी दृष्टि और ज्ञान पर भी निर्भर करते हैं। जब हमारी दृष्टि और ज्ञान सीमित होंगे, तो हमारे विचार भी संकीर्ण होंगे। इस प्रकार स्वार्थी लोग हमेशा अपने विचारों और दृष्टि को अपनी स्वार्थी इच्छाओं और उद्देश्यों तक सीमित रखते हैं और अवसरवादियों की तरह व्यवहार कर सकते हैं, जिनके मन और दिल में कोई व्यापकता नहीं है। इसी तरह, परोपकारी लोग परोपकार को अपनी विचारधारा बनाते हैं। 



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